काम का महत्व

भारत में पैसे और लोगो की कमी नहीं हैं। कमी हैं सोच, तरीके और नवाचार की। जुगाड़, 'ऐसे ही होता हैं' और 'काम चलाओ' में हमारा प्रगति और अन्तःकरण बिक चुका हैं। 

शिक्षकों के अरुचि और व्यर्थ व्यापार में युवा शिक्षा से दूर, बुरे व्यसन में लग गए हैं। 

अमीर अपना महल बना रहे हैं और गरीब अपने स्थिति में दिशाहीन खोये हैं। 

मेहनत नहीं, जल्दबाजी का जमाना हैं। स्वार्थ और भेदभाव में मस्त हम बेहतर भविष्य को कहा देख पा रहे हैं?

पूरा नाम, धर्म और जाती जानकार ही सम्मान दिया जाता हैं। पद और पैसो की चापलूसी में समानता हवा में खो गयी हैं। 

एक तरफ exam लिखने जाए तो exam का scam हो रहा हैं, दूसरी ओर जिन exam के लिए बच्चों को तैयारी कराना चाहिए, वहाँ cheating करा के उनको आगे भेज दिया जाता हैं। 

भारत कही शहरों में कुछ बड़ रहा होगा लेकिन यहाँ गाँव के स्कूल में अंधेरा और आलस दिखता हैं। और आंगनवाड़ी में तनाव और कुपोषण। 

अपने काम का महत्व जान, एक समान होकर हम जब मेहनत करेंगे तो उम्मीद हैं की भविष्य बेहतर कही कुछ हो पाएगा - इस भविष्य को हमें रोज रचना होगा। तभी पूरी आज़ादी मिलेगी। 

(taken from pinterest)


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